Tuesday, 17 May 2016

कवितामयी संसार

कवितामयी संसार में रहना भी,
कितना सुखमय होगा,
सत्ताइस नहीं
छियालीस नक्षत्रों से कवि
भविष्य बनाएंगे।
कविता मय अपने शरीर को
कभी उपमा कभी रूपक
अलंकार से सजाएंगे।
रसपान का तो नाम ही मत लीजिए
श्रृंगार, हास्य तो मुस्कान
और वीर भयानक
ह्रदय में उत्साह उमंग का
बीज बो जायेंगे।
बस वीभत्स से घृणा रुपी
काले घनघोर जलद
जब जुगुप्सा रुपी अम्ल वर्षा
से हर मन में
भयानक भय पनपाएंगे।
कहीं दूर देश से
अद्भुत आश्चर्य नायक
शांत और निर्वेद वातावरण का
कवितामयी संसार में
नव निर्माण कराएँगे॥

Sunday, 20 September 2015

एक ही चाहत

कहते कहते हम कुछ कह गए ,

जो आप तक ना पहुंचा ,

आँखों से सुनने की जुर्रत न की आपने ,

होंठों को सीए हम रह गये ।


बुना तो बहुत कुछ था सपनों में हमने ,

दिए जले थे दिलो - दमाग में ,

एक हवा के झोकें से ,

बुझ के रह गये । 


बनायीं तो थी हमने मिलकर एक कहानी ,

पर वक्त की वास्तविकता में ,

कच्चे घड़े से ढह गये ।


हम इंतज़ार किस घड़ी का कर रहे थे ,

कि सुईयों की भूलभुलैया 

में ही फँस के रह गये । 


संदेशा भी भेजा ,

कोशिश भी करी बताने की उन्हें ,

बस एक उत्तर के इंतज़ार में ही रह गये ।


अपने व्यहार ,

और सही समय के इंतज़ार ,

बस समय की मार में ही बह गये । 


अब भी आसरा है हमें ,

बुनते हैं ख्वाब अभी भी ,

कि तुम्हारे साथ , दुनिया से परे ,

प्रेम के सागर में बह गये ।

एक ही चाहत है,

कि  कुछ पल के लिए

इन भावनाओं की गुत्थी तुम पर गिर गये । 

If all this is possible

Sometimes I want to know you’re okay,
Sometimes I have to hear your voice,
Sometimes I want to see you,
Sometimes I wish,
If all this is possible.
We’re getting apart,
and I know what you want,
doesn’t matter what I wish,
and I know
There is still hope,
Maybe I don’t want to try,
Maybe I am afraid,
Maybe you’re happy,
Maybe I don’t have a choice,
Maybe I am late,
Maybe I am stuck.
This is a special day,
want to make it memorable, if I may.
Wish you a great life ahead,
Maybe I will never try instead
or
Maybe I never tried instead.

Sunday, 10 May 2015

माँ

कुछ खास नहीं देने को पर,
एक पल की याद तो दे सकता हूँ,
तूने दिया ये जीवन हमको,
मैं एक मुस्कान तो दे सकता हूँ । 

ना जाने क्या क्या झेल तूने,
ना जाने क्या क्या है सहा,
बस हम ना रोएँ एक पल,
यही तेरा जीवन आधार बना। 

कितनी ही गलतियां करी हैं मैंने,
माफ़ किया हर बार ही तैनें,
कई पाठ हैं सीखे तुझसे,
कई और तू सीखा रही,
अपनी खुशियों से पहले तूने,
हमको जाना, हमको माना। 

इक-इक पल इस इस जीवन का,
फिर से जिन चाहूँ मैं,
हर इक दिन में,
तेरी खुशियों को,
चुन चुन कर गिनना चाहूँ मैं।

इस धरती पर
भगवान  से पहले,
तेरी पूजा करना चाहूँ मैं। 

तेरी हर एक इच्छा को,
शिरोधार्य कर सम्मान करूँ,
पूरे तपबल और शक्ति बल से,
उनको पूरा करना चाहूँ मैं। 
 


Friday, 1 May 2015

मुसाफिर

दिये जलते हैं
दिए बुझते हैं
रौशनी होती है
अँधेरा जाता है
गम जाते है
ख़ुशी आती है
बस हम वहीँ रह जाते हैं ।
जहाँ से शुरू हुआ था ये कारवां
ठहरा है वहीँ पर है
कश्ती कहाँ है
किसको पता है
जाना कहाँ है
किसको पता है
बस चले जा रहे है
एक मुकाम हासिल हुआ है अभी तो
कुछ पल यहाँ भी सही
फिर तो जाना है वहीँ ||

Thursday, 12 February 2015

Darkness and Light

River is flowing,
Quietly and happily,
The sun is shining,
Warm and with a smile,
Flowers are growing,
Bigger and bigger,
Moon is fading,
Slowly and steadily,
Light is spreading,
For a new beginning.

Get up, future awaits you,
Night has ended,
Open your tiny little eyes,
Fill your heart with
This sacred light,
Let go the darkness,
Of scary and fearful night.
But you have to ask;
One thing to yourself might?
Why the darkness and light,
Always fight?
Shadows of each other,
They are,
Cause without fight,
There is no light.

Wednesday, 17 December 2014

और एक मुस्कान - 2

"और एक मुस्कान " रात के स्वप्न में प्रारम्भ हुई इस कविता का ,इस अंक में , मैं अरुणोदय से मिलाप करा रहा हूँ , जहाँ एक नयी मुस्कान ने जन्म लिया है।


जीवन बाँटने के लिए एक जीवन...
आस बटोहती  आँखें ,
एक खुला हुआ हाथ , एक बढ़ा हुआ हाथ ,
एक बूँद पानी ,
मुस्काते हुए होंठ ,
तृप्त होने का एहसास ,
अरुणोदय की गर्माहट ,
कलियों की खिलखिलाहट ,
और एक मुस्कान...