Sunday, 11 August 2013

AGAJ KARUNGA AB INTZAAM BAHUT HUE

जिंदगी है, कहाँ किसे ले जाती है ,
कोई अपना गर मिल जाये
तो ज़िन्दगी ठहर भी न पाती है ।
हम चले तो भी ठीक ,
न चले तो भी ठीक ,
इस गाड़ी के पहिये को कोई भी चीज़ रोक न पाती है ।
संसार क्या है ,
इन्सान क्या है ,
सच कहूं मै
तो वो भगवान क्या है ,
जिसे जहाँ तक पहुंचना है ,
वो चला जाता है ,
कौन माई का लाल है ,
जो रोक पाता है ।
बस एक मैं हूँ जो
देखता जाता हूँ ,
बस यूँ कलम उठाकर
कुछ भी लिखता जाता हूँ ।
किसी का मलाल नहीं मुझे
बस यूँ ही उठा ली कलम
सोचा कुछ लिख लूँ ,
पर  है ये  मेरा भरम ।
मेरे लिखने का क्या लाभ है ,
फिर भी ये मन है कि बेताब है ,
सोचता रहता हूँ दिन दिन भर ,
कर पाता देश के लिए मुठ्ठी भर ।
अपने ह्रदय में न जाने क्या हूँ संजोये हुए ,
आगाज करूँगा अब इंतजाम बहुत हुए ॥ 

Ankur Shukla
 July 30,2013,10:50 PM