Sunday, 18 August 2013

वक़्त है !!

जो कहानियां सुनकर हम बड़े हुए हैं ,
आज उन्हें सुनाने का वक़्त है ,
पर सुनाये किसको ,
इस प्रश्न पर मुस्कुराने का वक़्त है ।
वो छोटे छोटे क्षण थे ,
जो भूत में सिमटे हुए हैं ,
आज फिर उन्हें गुनगुनाने का वक़्त है ।
ये वक़्त का ही  सिलसिला है ,
आज फिर कुछ भूल जाने का वक़्त है ।
कुछ नए आयाम मिले जिंदगी को ,
आज उन्हें शिखर पर पहुचाने का वक़्त है ।
हृदय में जो संजोये है सपने ,
आज किसीको सुनाने का वक़्त है ।
बस दिल तो यही कह रहा है ,
ये दिमाग है कि ख्यालों में बह रहा है ,
न जानने कहाँ से शुरू हुआ सफ़र ,
कहाँ है मंजिल ,
बह यही गुनगुनाने का वक़्त है ।
अब चले कहाँ ये राही !!
यही तो स्वयं को आजमाने का वक़्त है ।

Ankur Shukla
 1:36 AM, Aug 19,2013