Wednesday, 25 December 2013

A poem by Dr. Kumar Vishwas...

"टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर
पत्थर की छाती मे उग आया नव अंकुर
झरे सब पीले पात कोयल की कुहुक रात
प्राची मे अरुणिम की रेख देख पता हूँ
गीत नया गाता हूँ"
आपके इन शब्दों में आज का सच देख पा रहा हूँ। नव-निर्माण के बासंती स्वर फूट रहे हैं, स्वराज का नव-अंकुर प्रस्फुटित हो गया है। आशीर्वाद दें, कि अरुणिम की यह रेख जल्द ही एक नई सुबह में परिवर्तित हो। 
वास्तविक राष्ट्रवाद के प्रखर-स्वर, मेरे कविकुल-अग्रज, अटल जी के जन्म-दिवस पर उनके स्वस्थ दीर्घ-जीवन की कामना के साथ सादर प्रणाम !

and very Happy Birthday to Shri Atal Bihari Bajpayee Ji..