Thursday, 25 July 2013

VIJAY DIWAS



‘हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्‌’।

(या तो तू युद्ध में बलिदान देकर स्वर्ग को प्राप्त करेगा अथवा विजयश्री प्राप्त कर पृथ्वी का राज भोगेगा।) गीता के इसी श्लोक को प्रेरणा मानकर भारत के शूरवीरों ने कारगिल युद्ध में दुश्मन को पाँव पीछे खींचने के लिए मजबूर कर दिया था। यह दिन है उन शहीदों को याद कर अपने श्रद्धा-सुमन अर्पण करने का, जो हँसते-हँसते मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। यह दिन समर्पित है उन्हें, जिन्होंने अपना आज हमारे कल के लिए बलिदान कर दिया। कारगिल युद्ध भारत के इतिहास में एक ऐसी बानगी रखता है जब पूरा देश अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध था।



आज से 14 साल पहले सन् 1999 में कारगिल में हुए युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को धूल चटा दी थी | कारगिल युद्ध को ऑपरेशन विजय कहा जाता है . इस युद्ध में भारत के 527 वीर जवान शहीद हुए थे

नमन उन शूरवीरों को… 
वन्दे मातरम ....
भारत माता की जय।

हे जन्म भूमि भारत

हे जन्म भूमि भारत,हे कर्म भूमि भारत
हे वन्दनीय भारत,अभिनंदनीय भारत ||
जीवन सुमन चढ़ाकर आराधना करेंगे,
तेरी जनम-जनम भर,हम वंदना करेंगे,
हम अर्चना करेंगे ||१||

महिमा महान तू है,गौरव निधान तू है,
तू प्राण है हमारी,जननी समान तू है,
तेरे लिए जियेंगे,तेरे लिए मरेंगे,
तेरे लिए जनम भर हम साधना करेंगे
हम अर्चना करेंगे ||२||

जिसका मुकुट हिमालय,जग जग मगा रहा है,
सागर जिसे रतन की,अंजुली चढा रहा है ,
वह देश है हमारा,ललकार कर कहेंगे,
इस देश के बिना हम,जीवित नहीं रहेंगे,
हम अर्चना करेंगे ||३||

जो संस्कृति अभी तक दुर्जेय सी बनी है,
जिसका विशाल मंदिर,आदर्श का धनी है,
उसकी विजय ध्वजा ले हम विश्व में चलेंगे.
संस्कृति सुरभि पवन बन,हर कुञ्ज में बहेंगे
हम अर्चना करेंगे ||४||

शास्वत स्वतंत्रता का जो दीप जल रहा है,
आलोक का पथिक जो अविराम जल रहा है,
विश्वास है कि पल भर रुकने उसे न देंगे,
इस दीप की शिखा को ज्योतित सदा रखेंगे,
हम अर्चना करेंगे ||५||

Wednesday, 10 July 2013

UNTITLED

1. हर  कदम  बढ़े  , करे  मंजिल  को पास ,
कदम -कदम  पर  घटे , न लक्ष्य  की ये  आस । 
दूर है  मगर  पास आ  रही , बुझा  रही  है चाह  की  ये  प्यास । 
कदम  कभी  डिगे नहीं  इस  राह से , अर्श  से  फर्श  पर गिरोगे लक्ष्य  की बाँह  से ॥ 

2. उड़ रहा  है एक   परिंदा  आँधियों  के सामने ,
     ताकत न हो मगर  हौसला होगा जरुर । 
    गर बहती  रही  नदी इस तरह से ,
    तय होगा समंदर तक का  फासला  जरुर ॥