Friday, 27 December 2013

कि तुम भी एक पहचान हो !!!

ज़िन्दगी की राहों में आगे तो बढ़ जायेंगे ,
बस आपको याद करते जायेंगे ।
कहाँ से चले थे ,
इसकी किसे खबर ,
बस आप से मिले ,
और कुछ पल में आसमां पर थे ।
क्या किया आपने ,
जो हममें विश्वास आया ,
कुछ कर दिखाने का अहसास आया ।
आज याद करता हूँ वह समय ,
तो मस्तिष्क में उभरते हैं वे शब्द ,
कर्कश तीरों की  तरह चुभते थे हृदय पर ,
ये अहसास तो था ही न मुझमें ,
कि एक दिन ज्ञात होगा ,
वे कर्कश तीर नहीं , नीर हैं,
जो हमें उस ऊँचाई  पर पहुँचा रहा है ,
मीठा अमृत है ,
वो तक़दीर नहीं ,
आपकी मेहनत है ,
जो हममें आग जलाती है ,
अंधकार की  लौ बुझाती  है ,
हमें विश्वास दिलाती है,
कि तुम ही हो ,
भूल जाओ दुनिया , संसार को ,
अपने लिए करो ,
और खुद ही भरो ,
क्यों कोसते हो दूसरों को ,
माता को , पिता को ,
अध्यापक और भगवान को ,
भगवान नहीं तो सरकार को ,
उठो , तुम महान  हो ,
तुम ही देश का उठान हो ,
चलते हुए आग पर ही ,
तुम्हे मंज़िल मिलेगी ,
तो क्या सोचते हो ?
अपने पैरों में बंधी जंजीर को तोड़ो ,
अपने आखों में बंधी पट्टी उतारो ,
इक नया इतिहास लिख डालो ,
इक सपना तुम्हे पुकार रहा है ,
पूरा कर उसे इस विश्व को दिखला दो ,
कि तुम भी इक इंसान हो ।
कि तुम भी एक पहचान हो ॥ 

Wednesday, 25 December 2013

A poem by Dr. Kumar Vishwas...

"टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर
पत्थर की छाती मे उग आया नव अंकुर
झरे सब पीले पात कोयल की कुहुक रात
प्राची मे अरुणिम की रेख देख पता हूँ
गीत नया गाता हूँ"
आपके इन शब्दों में आज का सच देख पा रहा हूँ। नव-निर्माण के बासंती स्वर फूट रहे हैं, स्वराज का नव-अंकुर प्रस्फुटित हो गया है। आशीर्वाद दें, कि अरुणिम की यह रेख जल्द ही एक नई सुबह में परिवर्तित हो। 
वास्तविक राष्ट्रवाद के प्रखर-स्वर, मेरे कविकुल-अग्रज, अटल जी के जन्म-दिवस पर उनके स्वस्थ दीर्घ-जीवन की कामना के साथ सादर प्रणाम !

and very Happy Birthday to Shri Atal Bihari Bajpayee Ji..