Sunday, 15 June 2014

अभी तो आये थे ,

This poem is devoted to all my seniors, Farewell!!

अभी तो आये थे ,
अभी जाना हो गया ,
फिर से जैसे नयी ज़िन्दगी का बहाना हो गया  

अंतिम वर्ष , कॉलेज का आखिरी साल ,
 रोमांचकता से भरपूर पर अब कुछ अजीब सा लगता है
 ख़ुशी भी है और दुःख भी पर ऐसा क्यों
ये चार साल जिनकी यादें भुलाई नहीं जा सकती ,
 बस यही ख़त्म होने कि कगार पर हैं ,
 ये दोस्त जिनके साथ मैंने ज़िन्दगी का सबसे अच्छा समय बिताया ,
 इनका साथ बस यही तक था
 अब इनके साथ वे अठखेलियाँ याद आएँगी ,
 वो बक-बक भरी बातें याद आएँगी ,
 वो भीड़ से भरा कॉमन रूम ,
जिसमे एक छक्का पड़ते ही चीखने कि आवाज़ गूंज जाती थी ,
 सब आज जाने को है   
अब एक नयी ज़िन्दगी ,
नयी जगह हमारा इंतज़ार कर रही है ,
 सभी के लक्ष्य अलग हैं ,
जाना तो सभी को अपने रस्ते ही है
ज़िन्दगी भी क्या चीज़ है ,
कुछ को पास लाती है ,
 कुछ दूर हो जाता है।
अब तो सिर्फ फेसबुक और व्हाट्सप्प का सहारा रह जायेगा ,
अब होंठों के बजाय , अंगुलियां और अगूंठे चलेंगे
पर वो कहते है ना ,(कोई और नहीं कहता सिर्फ मै  ही कहता  हूँ);

कुछ पाना है तो कुछ खोना पड़ेगा  
इस दुनिया में हंस हंस के रोना पड़ेगा  

अरे , अभी कुछ ज्यादा भावनाओं में बह गया ,
 पर ख़ुशी भी इस बात की  है कि मैं एक कदम और आगे बढ़ा हूँ
 इस ज़मीनी धरातल पर अब अपने पैरों पर खड़ा हूँ ,

दुआ करता हूँ कि इस कॉलेज ने जो मुझे दिया , मैं भी इसको तिनका भर लौटा सकूँ