Thursday, 20 February 2014

दुनिया को ज़रूरत है हमारी

कभी  कभी ज़िन्दगी में कुछ ऐसी घटनाएं घटती हैं जिनसे हमें बहुत कुछ सिखने को मिलता है । हर व्यक्ति के साथ कभी कहीं कुछ ऐसा होता ज़रूर है जिससे कि वह दिल से , दिमाग से जुड़ जाता है बिना कुछ सोचे समझे भावुक हो जाता है ,और जब जज्बात से परे जाकर , दिलो दिमाग से , मस्तिष्क कि परिकल्पनाओं को किनारे रख कर , उन बातो और लम्हो पर गौर करता है , तो कुछ और ही दीख पड़ता है । अभी तक के ज़िन्दगी के सफ़र में जो भी अनुभव मुझे मिला उन्ही अनुभवों में से कुछ पल इस प्यारी सी कविता में पिरोने की कोशिश है ।

आपने तो सिर्फ अपना ही सोचा ,
हमें तो बस य़ू  ही कोसा ।
ये कहकर कि तुम याद न आओ ,
तुम्हे देखकर बस रोना आता है ,
आपके मुख से मुखर इन शब्दों से ,
याद उन क्षणों का एक कोना आता है ।

हम तो चाहते हैं आप यूं ही खुश रहे ,
ज़िन्दगी भर सारी  खुशियाँ तुम्हे मिलती रहें ।
हर शाम आपकी , यूं ही ख़ुशी से ढलती रहे ।

अपना क्या है , निपट ही जायेगा ,
धक्के से गाड़ी का पहिया कीचड़ से निकल जायेगा ॥

हम मुकाम की  तरफ बढ़ चले हैं ,
नामुमकिन सी दिखने वाली पहाड़ी पर चढ़ चले हैं ,
बस यही तमन्ना है हमारी ,
दुआ देना , दुनिया को ज़रूरत है हमारी ॥


10:53 AM ,Nov 29,2013

Friday, 7 February 2014

संगठन गढ़े चलो सुपंथ पर बढे चलो

यह कविता हमारे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार की एक बार का  मासिक गान है । तब मै कक्षा १० में पढ़ा करता था । हमारा विद्यालय विद्याभारती  के अंतर्गत ही आता है। विद्या भारती संघ के माध्यम से शहरों और गावों में विद्यालयों के द्वारा  "वसुधैव कुटुंबकम " और देशभक्ति संगठन के भाव को घर घर पहुचाने  का काम करती है। यह कविता तब से ही मेरी मनपसंद कविता है । आज काफी दिनों के पश्चात मेरे मन मस्तक में इस गीत के कुछ शब्द गूँज गए तुरत ही मैंने सोचा क्यूँ न आप सभी को इस देश भक्ति और संगठन के भाव से परिपूर्ण गीत से परिचित कराऊँ...

 
संगठन गढ़े चलो सुपंथ पर बढे चलो ,
भला हो जिसमें देश का वो काम सब किये चलो । । 
युग के साथ मिलकर सब कदम बढ़ाना सीख लो ,
एकता के स्वर में गीत गुनगुनाना सीख लो ,
एकता के स्वर में गीत गुनगुनाना सीख लो ,

भूल कर भी मुख में जाति पंथ कि न बात हो ,
भाषा प्रान्त के लिए कभी न रक्तपात हो ,
फूट का भरा घड़ा है फोड़ कर बढे चलो,
संगठन गढ़े चलो सुपंथ पर बढे चलो ,
भला हो जिसमें देश का वो काम सब किये चलो ,
भला हो जिसमें देश का वो काम सब किये चलो । । 

आ रही है आज चारों  से यही पुकार ,
हम करेंगे त्याग मातृभूमि के लिए अपार ,
हम करेंगे त्याग मातृभूमि के लिए अपार ,
कष्ट जो मिलेंगे मुस्करा के  सहेंगे हम ,
देश के लिए सदा जियेंगे और मरेंगे हम ,
देश का ही भाग्य अपना भाग्य है ये सोच लो ,
संगठन गढ़े चलो सुपंथ पर बढे चलो ,
भला हो जिसमें देश का वो काम सब किये चलो ,
भला हो जिसमें देश का वो काम सब किये चलो । । 



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