Tuesday, 24 June 2014

आह्लाद

अभी कुछ वर्षो में जो घटनायें सामने आई हैं , उनसे सभी का मन आहत हुआ ही है । ऐसे ही एक दिन , यूँ ही  , बैठे बैठे सोच रहा था कि  कैसे , आखिर कैसे होते हैं , वो लोग जो ऐसी अमानवीय घटनाओं को अंजाम देते हैं । केवल वाकया सुनने भर से दिल सहम जाता है । जिस पर बीतती होगी , उसकी भावनाओं को महसूस कर इस कविता में पिरोने की कोशिश कर रहा हूँ ।

इसे रंग दूँ तो ऐसा लगे ,
जैसे वीरानों में रंग भर रहा हूँ ,
और मातम में गम भर रहा हूँ ,
वो चिल्ला रही है ,
कई घरों में माँ  उसे सहला रही है ,
कितना दर्द है , कितना दुःख है ,
उसकी आवाज़ में ,
न जाने कहाँ से आ रही है ।

ये पीड़ा कितनी भयंकर होगी ,
जो मैं केवल कल्पना में भी सहन न कर पाया ,
पर मेरे अंदर के जानवर ने ही उसे जन्माया ,
आखिर कब ये अत्याचार ख़त्म होगा ।
आखिर कब, ये आह्लाद ख़त्म होगा ।

कब समझेंगे हम ,
कि वो भी इंसान है ,
सोच को सम्भालों यारों ,
सोच से ही जगता ये हैवान है ।

कह तो रहा हूँ ,मै  कितनी आसानी से ,
पर ये जो कुभावना है ;
इसका मज़ा सबके लिए ,
देखो कितना लुभावना है ,
करते हैं लोग नशे में शायद ,
पर हसते तो होश में हैं ,
और बाद में करते हैं कवायद ,
क्या है ,
क्यों नहीं समझते तुम ,
क्या कहूँ मैं ,
कैसे समझाऊं ,
सबके पास मेरी वाद का ,
प्रतिवाद है ।
पर इसके लिए मैं ,
यूँ चुप नहीं बैठ सकता ,
हैवान की हवस को ,
बेजान नहीं देख सकता ,
तलवार नहीं हाथ में तो क्या ,
कलम भी कभी तलवार से काम रही है ,
कर तो कुछ भी न पाया इन हाथों से ,
लिखना तो मेरे बस में अभी भी है ।

गर ये कविता ,
आपके ह्रदय में कहीं वार करे ;
देखना कहीं आस - पास  कोई ,
किसी की ज़िन्दगी न बर्बाद करे ।

Sunday, 15 June 2014

अभी तो आये थे ,

This poem is devoted to all my seniors, Farewell!!

अभी तो आये थे ,
अभी जाना हो गया ,
फिर से जैसे नयी ज़िन्दगी का बहाना हो गया  

अंतिम वर्ष , कॉलेज का आखिरी साल ,
 रोमांचकता से भरपूर पर अब कुछ अजीब सा लगता है
 ख़ुशी भी है और दुःख भी पर ऐसा क्यों
ये चार साल जिनकी यादें भुलाई नहीं जा सकती ,
 बस यही ख़त्म होने कि कगार पर हैं ,
 ये दोस्त जिनके साथ मैंने ज़िन्दगी का सबसे अच्छा समय बिताया ,
 इनका साथ बस यही तक था
 अब इनके साथ वे अठखेलियाँ याद आएँगी ,
 वो बक-बक भरी बातें याद आएँगी ,
 वो भीड़ से भरा कॉमन रूम ,
जिसमे एक छक्का पड़ते ही चीखने कि आवाज़ गूंज जाती थी ,
 सब आज जाने को है   
अब एक नयी ज़िन्दगी ,
नयी जगह हमारा इंतज़ार कर रही है ,
 सभी के लक्ष्य अलग हैं ,
जाना तो सभी को अपने रस्ते ही है
ज़िन्दगी भी क्या चीज़ है ,
कुछ को पास लाती है ,
 कुछ दूर हो जाता है।
अब तो सिर्फ फेसबुक और व्हाट्सप्प का सहारा रह जायेगा ,
अब होंठों के बजाय , अंगुलियां और अगूंठे चलेंगे
पर वो कहते है ना ,(कोई और नहीं कहता सिर्फ मै  ही कहता  हूँ);

कुछ पाना है तो कुछ खोना पड़ेगा  
इस दुनिया में हंस हंस के रोना पड़ेगा  

अरे , अभी कुछ ज्यादा भावनाओं में बह गया ,
 पर ख़ुशी भी इस बात की  है कि मैं एक कदम और आगे बढ़ा हूँ
 इस ज़मीनी धरातल पर अब अपने पैरों पर खड़ा हूँ ,

दुआ करता हूँ कि इस कॉलेज ने जो मुझे दिया , मैं भी इसको तिनका भर लौटा सकूँ