Saturday, 18 October 2014

स्वच्छता अभियान : निर्मल भारत की ओर एक कदम


पिछले कुछ दिनों से हम भारत में स्वच्छता अभियान की बातें सुन रहे हैं । यह अभियान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्मदिवस पर श्रीमान नरेंद्र मोदी जी ने प्रारम्भ किया है । यह अभियान नागरिकों की मानसिकता को परिवर्तित करने का अनोखा तरीका साबित हो सकता है , यदि सही से कार्यान्वित किया जाय ।

भारत की जो विश्व भर में साफ सफाई को लेकर छवि है , वह विचार करने योग्य है । इसका कारण हम सभी नागरिक हैं । हम अपने घर  साफ स्वच्छ रखना चाहते हैं , परन्तु सार्वजानिक स्थलों को जैसे कूड़ा-खाना ही समझते हैं । सार्वजानिक स्थलों को स्वच्छ रखना भी हम नागरिकों का कर्तव्य है , जब हम यह बात अपने मस्तिष्क में बैठा लेंगे , तब जाकर प्रधानमंत्री जी के स्वच्छता अभियान को सफलता मिलेगी ।

एक घटना, इसी तथ्य  जुड़ी हुई , कहीं पढ़ रहा था मैं । एक भारतीय महानुभाव एक बार पेरिस की यात्रा पर गए परन्तु भारतीय लक्षणों को भारत में न छोड़ सका । सड़क पर चलते चलते एक बार किसी वस्तु के पैकेट को यूँ ही सड़क पर फेंक दिया । उधर से एक महानुभाव ने बड़ी ही सहज़ता से उसे उठाकर कूड़ेदान में डाला और उन्होंने यह कार्य उतनी ही ख़ुशी और सहज़ता से किया , कि जैसे यह उनका दैनिक कार्य हो । हमें इन बातों , इन कथाओं , इन घटनाओं से सीख लेनी चाहिए । एतैव  तातपर्य यह ही है कि हमें अपने विचारों को बदलकर देश के  हित में सोचना होगा ।

और सिर्फ समस्या स्वच्छता की ही नहीं है , कूड़ा निस्तारण की भी है। कैसे और कहाँ , साफ़ सफाई से निकले कूड़े को रखा जाय ? कैसे इसे प्रयोग किया जाय ? भारत में इसकी भी बड़ी समस्या है । प्रधानमंत्री जी को स्वच्छता अभियान के साथ साथ solid  waste management पर भी कार्य करने की आवश्यकता है ।

विभिन्न देश कूड़े का उपयोग उर्वरक तथा बिज़ली उत्पादन में कर रहें हैं , भारत में कही भी ऐसा बड़ा सयंत्र नहीं है । बल्कि यहाँ कूड़े को शहरों के बाहर एक बड़े स्थान पर डम्प करते हैं । इन डंपिंग प्लेसेस के आस पास रहने वाले लोगों में कूड़े के ढेर की वजह से विभन्न प्रकार की बीमारियां फैलती हैं । वहां की उपजाऊ जमीन , रिसने वाले द्रव्य के कारण बंजर भूमि में बदल रही है । ये केवल तथ्य नहीं है , इन बातों के ठोस आकड़ें मौजूद हैं । विभिन्न संस्थाएं जैसे उनिसेफ के सर्वै में ये आकड़ें हमें रोज़ ही दीख पड़ते हैं । अतः प्रधानमंत्री जी से मेरा निवेदन है कि इस ओर भी अपना ध्यान आकर्षित करें ।

Wednesday, 1 October 2014

असमंजस

गांधी जयंती के अवसर पर गांधी जी के विचारों से ओत - प्रोत इस कविता के माध्यम से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को मेरा प्रणाम.......


ये दुनिया देखती है  मुझे ,
पूछती है , कहती है ,

क्या किया तूने ए पथिक दुनिया के लिए ,
मै भी असमंजस में हूँ ,
कि स्वयमेवादी बनूँ या समाजवादी बनूँ ,
खुद के लिए कुछ करूँ कि दुनिया के लिए बनूँ ।

ये दुविधा थी तो बड़ी मेरे लिए ,
पर समाधान बहुत छोटा मिला ,
कि न स्वयमेवादी का विचार हो ,
न समाजवादी का हो ,
आत्मचिंतन और आत्ममंथन का सवाल हो ,

क्या हो तुम ,
क्यों हो तुम ,
गर ये पता हो जाये तुम्हे ,
तब ही कुछ बात हो ।

सभी आश्वस्त होंगे तुमसे ,
अगर तुमने ये कर दिखाया ,
अंत में  फिर भी एक प्रश्न रहेगा तुमसे ,
क्या , क्यों तुमने ये कैसे पाया ?