Sunday, 10 May 2015

माँ

कुछ खास नहीं देने को पर,
एक पल की याद तो दे सकता हूँ,
तूने दिया ये जीवन हमको,
मैं एक मुस्कान तो दे सकता हूँ । 

ना जाने क्या क्या झेल तूने,
ना जाने क्या क्या है सहा,
बस हम ना रोएँ एक पल,
यही तेरा जीवन आधार बना। 

कितनी ही गलतियां करी हैं मैंने,
माफ़ किया हर बार ही तैनें,
कई पाठ हैं सीखे तुझसे,
कई और तू सीखा रही,
अपनी खुशियों से पहले तूने,
हमको जाना, हमको माना। 

इक-इक पल इस इस जीवन का,
फिर से जिन चाहूँ मैं,
हर इक दिन में,
तेरी खुशियों को,
चुन चुन कर गिनना चाहूँ मैं।

इस धरती पर
भगवान  से पहले,
तेरी पूजा करना चाहूँ मैं। 

तेरी हर एक इच्छा को,
शिरोधार्य कर सम्मान करूँ,
पूरे तपबल और शक्ति बल से,
उनको पूरा करना चाहूँ मैं। 
 


Friday, 1 May 2015

मुसाफिर

दिये जलते हैं
दिए बुझते हैं
रौशनी होती है
अँधेरा जाता है
गम जाते है
ख़ुशी आती है
बस हम वहीँ रह जाते हैं ।
जहाँ से शुरू हुआ था ये कारवां
ठहरा है वहीँ पर है
कश्ती कहाँ है
किसको पता है
जाना कहाँ है
किसको पता है
बस चले जा रहे है
एक मुकाम हासिल हुआ है अभी तो
कुछ पल यहाँ भी सही
फिर तो जाना है वहीँ ||