Wednesday, 17 December 2014

और एक मुस्कान - 2

"और एक मुस्कान " रात के स्वप्न में प्रारम्भ हुई इस कविता का ,इस अंक में , मैं अरुणोदय से मिलाप करा रहा हूँ , जहाँ एक नयी मुस्कान ने जन्म लिया है।


जीवन बाँटने के लिए एक जीवन...
आस बटोहती  आँखें ,
एक खुला हुआ हाथ , एक बढ़ा हुआ हाथ ,
एक बूँद पानी ,
मुस्काते हुए होंठ ,
तृप्त होने का एहसास ,
अरुणोदय की गर्माहट ,
कलियों की खिलखिलाहट ,
और एक मुस्कान...

-- अंकुर शुक्ल
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