Tuesday, 17 May 2016

कवितामयी संसार

कवितामयी संसार में रहना भी,
कितना सुखमय होगा,
सत्ताइस नहीं
छियालीस नक्षत्रों से कवि
भविष्य बनाएंगे।
कविता मय अपने शरीर को
कभी उपमा कभी रूपक
अलंकार से सजाएंगे।
रसपान का तो नाम ही मत लीजिए
श्रृंगार, हास्य तो मुस्कान
और वीर भयानक
ह्रदय में उत्साह उमंग का
बीज बो जायेंगे।
बस वीभत्स से घृणा रुपी
काले घनघोर जलद
जब जुगुप्सा रुपी अम्ल वर्षा
से हर मन में
भयानक भय पनपाएंगे।
कहीं दूर देश से
अद्भुत आश्चर्य नायक
शांत और निर्वेद वातावरण का
कवितामयी संसार में
नव निर्माण कराएँगे॥
-- अंकुर शुक्ल
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