Thursday, 13 April 2017

कौन हो तुम -2

अस्तित्व से लड़ाईयाँ चलती रहेंगी, जब तक इस दुनियां में हो। कुछ इन्ही लड़ाईयों से दो पंक्तियों की कविताएं निकलती हैं और यहां छप जाती हैं, तो उन्ही पुरानी लाइनों को आगे बढ़ा रहा हूँ,

कौन हो तुम,
चोर
क्या कीमती वस्तु है तुम्हारे पास,
मेरा व्यक्तित्व।

- अंकुर शुक्ल ( 13 अप्रैल 2017, शाम 3:02)

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