Sunday, 2 April 2017

कौन हूँ मैं

कौन हूँ मैं 

It’s been a while that I posted any post on this blog, but I promise to myself and you all today that from now on I will be posting everyday celebrating the national month of poetry April. It’s all starts today, This is an old poem, I did a video on this also. You will find a link below to my youtube channel. Make sure you subscribe for more good Hindi poems. 

एक तालाब में कैद मछली हूँ मैं,
अँधेरे में कहीं गुम,
कठपुतली हूँ मैं,
कौन नचा रहा ,
कौन नाच रहा ,
इसकी फ़िक्र किसे है ,
बस अपने पात्र में ,
कहीं गुम एक अभिनेता हूँ मैं । 

एक कविता है जो मेरे सरे रूपों को वास्तविकता से मिलती है , मेरी ही वाणी में पूरी कविता सुनने के लिए नीचे की वीडियो देखें। अच्छी लगे तो LIke एंड Subscribe करें , और हाँ क्रिटिकल comments जरूर करें । 
 

--अंकुर शुक्ल (२ अप्रैल २०१७ ४:१३ शाम )

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