Sunday, 2 April 2017

दिल में उठा था जो उमंगो का सागर

दिल में उठा था जो  उमंगो का सागर ,
थम सा गया है ,
वो हवा की सोंधी सी खुशबु ,
कहाँ गम हो गयी ,
वो  चन्द्रमा की शीतल रोशनी ,
मिट सी गयी,
कहानी शुरू हुई थी,
रुक सी गयी। 
मेरे सपनो को पर लग गए थे,
कहाँ उड़ चले थे वो,
उन्हें पता था नही,
उन्हें पता था नही,
उड़ के आना है यहीं। 
यही अपना आसरा है,
तुझे खुद का ही सहारा मिलेगा,
किसी से याचना छोड़ दे,
किसी को जांचना छोड़ दे,
ये दुनिया बड़ी ढोंगी है,
अपने आंसू बहन छोड़ दे,
ये आंसू बड़े कीमती हैं,
यु मुस्कुराना छोड़ दे,
मुस्कुराने के दिन होते बड़े काम हैं,
यूँ खिलखिलाना छोड़ दे ,
कहानी शुरू हुई थी रुक सी गयी। 


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