Saturday, 8 April 2017

कौन हो तुम

जब कभी अस्तित्व को लेकर झगड़ा होता है मेरा खुद से, तो शायद ऐसी कुछ पक्तियां लिख देता हूँ। शांत तो मन तब भी नहीं होता बल्कि कुछ विचार योग्य प्रसंग और जुड़ जाते हैं। देखते हैं अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा ही होता है या नहीं,
कौन हो तुम,
मैं
मैं नहीं हूं,
अस्तित्व जिससे था,
वो ही नहीं है अब।
-अंकुर शुक्ल (8 अप्रैल, 12:58 दोपहर) 
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